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काला पानी का इतिहास | Cellular Jail Facts In Hindi

  • Writer: Yash saini
    Yash saini
  • May 26, 2018
  • 3 min read

Updated: Aug 6, 2018

हिंदी रोचक तथ्य।


सेल्युलर जेल जिसे काले पानी के नाम से जाना जाता है, इसका निर्माण 1896 में शुरू हुआ और 10 मार्च, 1906 को पूरा हुआ। भारतीय इतिहास में यह जेल "काला पानी" के नाम से मशहूर है।



1.सेल्युलर जेल चेन्नई और कोलकाता दोनों से लगभग 1200 किमी. दूर अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में अंग्रेजो द्वारा बनाई गई थी।


2.ऐसा माना जाता है कि, उस समय इस विशाल जेल को बनाने में लगभग 5 लाख 17 हज़ार की लागत आई थी।


3.सेल्युलर जेल के निर्माण के लिए सबसे पहले 400 भारतीय कैदियों को यहाँ लाया गया और अंडमान निकोबार द्वीप के घने जंगलों को काट कर जेल से लिए जगह खाली करने का काम शुरू हुआ।


4.सेल्युलर जेल 7 शाखाओं में बनी थी मध्य भाग में निगरानी के लिए टावर बनाया गया था इसकी प्रत्येक शाखा तीन मंजिला बनाई गई।


5.सेल्युलर जेल में कैदियों के लिए 694 कोठरियां बनाई गई प्रतेक कोठरि की लम्बाई 15 फुट और चौड़ाई 8 फुट थी इनमे बने रोशनदान 3 मीटर की ऊंचाई पर बनाये गए थे।


6.सेल्युलर जेल में सबसे पहले अधीक्षक डेविड बेरी और मेजर जेम्स पी. वॉकर की सिक्यूरिटी में 200 क्रांतिकारियों को यहाँ लाया गया। बर्मा से भी भारी संख्या में लोगों को यहाँ लाया गया। सभी को अलग अलग सेल में रखा जाता था इसलिए इसे सेल्युलर जेल भी कहते हैं।


7.सेल्युलर जेल में लाये गए विद्रोहियों को लोहे की भारी हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़ा जाता था।


8.सेल्युलर जेल हर एक कैदी को रोजाना कोल्हू के बैल की भांति 13 से 14 किलो नारियल या सरसों का तेल निकालना पड़ता था| यह तेल ब्रिटिश अधिकारीयों की पत्नियाँ काम में लेती थीं।


9. यदि कोई कैदी तेल पूरा न निकाल पाए तो उन्हें कोड़ों से बुरी तरह पीटा जाता था। कितने लोगों को यहाँ पर फांसी दी गई उसकी गिनती नहीं है, अनेक कैदियों को तोप के मुँह से बांधकर उड़ा दिया जाता था।


10.एक बार 200 से भी अधिक विद्रोहियों ने यहाँ से भागने का प्रयास किया लेकिन वो असफल रहे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जिनमें से कुछ ने तो उन्हें मिलने वाली यातना के भय से ही आत्महत्या कर ली थी और बाकि बचे लोगों में से 87 को फांसी दे दी गई।


11.सेल्युलर जेल लाये गए विद्रोहियों से कोल्हू पेरने के अतिरिक्त भवन बनाने, बंदरगाह बनाने और जेल के निर्माण का काम भी कराया जाता था।


12.सेल्युलर जेल में कैदियों को पहनने के लिए टाट के बने वस्त्र दिए जाते थे जिनसे उनके शरीर तक छिल जाते थे। एक बार एक क्रान्तिकारी नन्द गोपाल ने ये वस्त्र पहनने से मना करते हुए कहा था कि अगर हम भगवान के घर से नंगे आ सकते है तो नंगे रह भी सकते हैं और इन्हें पहनने से नंगे रहना बेहतर है और वो नंगे भी रहे।


13.सेल्युलर जेल में एक बार झाँसी के परमानंद ने जेलर डेविड बेरी की जमकर धुनाई कर दी थी क्योंकि उसने परमानंद को गालियाँ दी थी बाद में परमानंद  को 30 कोड़ों की सज़ा दी गई थी।


14.द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने सेल्युलर जेल पर कब्ज़ा कर लिया था और अंग्रेजों को इस जेल में बंदी बना लिया इस दौरान उन्होंने सेलुलर जेल को काफी क्षतिग्रस्त कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद अंग्रेजों ने दोबारा इस पर कब्ज़ा कर लिया था।


15.देश आजाद होने के बाद 1963 में इसे हॉस्पिटल में बदल दिया गया जिसका नाम गोविन्द वल्लभ पन्त के नाम पर रखा गया और इसके बाद 1969 में इसे एक राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिया गया।


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